मै बहुत सोचता हूँ की में कुछ करू ऐसा जो मेरे हिस्से का कुछ अच्छा काम जो इंसान जन्म के साथ एक धर्म है उसे पूरा कर जाऊ! पर नजाने क्यों बुधिजिविता के चक्कर में वक़्त हाथ से निकल जाता है! बुधिजिविता एक बहुत बड़ा बीमारी हो गया है मेरे लिए! बिचारो का अनुगमन करना, अनुसरण करना अब अति साधारण लोगो का काम रह गया है और और अपने विचारो को जिसपे सहमत न हो वैसे उटपटांग विचारो को थोपना ये बुधिजिविता हो गया है! साधारण शब्दों में कहूँ तो जिस कहन रूपी पथ का हम अनुशरण खुद नहीं करते हुए दुसरे पे थोपना वो बुधिजिविता हो गया है हमारे लिए! और हमारे भारत का सौभाग्य है अब! जो अब यहाँ अति साधारण बहुत कम लोग रहते है! हमारा भारतवर्ष अब बुधिजीविओं का देश है! और साधारण बात है, भारत का एक सच्चा और देशभक्क्त होने के नाते में भी एक सच्चा बुद्धिजीवी बनने के लिए प्रयासरत हूँ ! मेरे अन्दर अतिसाधारण और बुद्धिजीवी में बहुत भीषण लड़ाई चल रहा है! एक जो बचपन में आत्मसात किये हुए शिक्षा की तरह एक खुबसूरत दुनिया का कल्पना करता है और एक दादागिरी वाले बच्चे की तरह कक्षा से बाहर निकल कर दुनिया के पाठशाला में खुद को को साबित करना चाह रहा है! पर जो भी हो इनसब के बिच "समय" चींटी के पंख की तरह अनजाने में अपना अंतिम उडान के निकट आ रहा है जो मै जानता हूँ और सायद आप भी! सवाल बहुत सारे है और जिंदगी एक! अति साधारण और बुधिजिविता के द्वंध में मुझे जो मिल रहा है वो किसी कुबेर की खजाने से कम नहीं है! ये खजाना प्रतिदिन आपके जिंदगी के द्वार पे आके लौट जाता है! जिसको ग्रहण करने के लिए आपको अपने बुद्धिजीवी भाई थोड़ी देर के लिए सुलाना परेगा जैसे की मै जानता हूँ ये भाई कभी सोता नहीं है पर कुछ समय के लिए सुप्त हो सकता है जब अति साधारण भाई को आप अपना पक्ष रखने का मौका देंगे!
विचार लीजिये और एक अति साधारण के समूह को मरने से बचा लीजिये...
मै शंकर शाह बुधिजिविता के ढोंग से निकल कर अन्ना हजारे और और रामदेवबाबा का समर्थन करता हूँ...ताकि बचपन में आत्मसात किये हुए शिक्षा को आज बनाकर अपने आने वाले पीढियों को एक अच्छा कल और गर्व करने का एक कारन दे सकू...
विचार लीजिये और एक अति साधारण के समूह को मरने से बचा लीजिये...
मै शंकर शाह बुधिजिविता के ढोंग से निकल कर अन्ना हजारे और और रामदेवबाबा का समर्थन करता हूँ...ताकि बचपन में आत्मसात किये हुए शिक्षा को आज बनाकर अपने आने वाले पीढियों को एक अच्छा कल और गर्व करने का एक कारन दे सकू...
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